प्यार का इकरार

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तो मैंने उसे फोन किया तो उसने बताया कि वो बाहर खाना लेने गई है.

मुझे मौका अच्छा मिल गया था. मैंने शैली के होंठों पर किस की तो शैली की आंखें थोड़ी खुल गईं. मैं थोड़ा दूर हुआ तो उसने मेरे कॉलर पकड़ कर मुझे करीब खींच लिया और होंठों पर होंठ लगा दिए.

मैंने उसे बैठाया और हाथ उसकी कमर में डाल कर उसे उठा लिया. वो मुझे एकदम ऐसी हल्की सी लगी जैसे मैं किसी बच्चे को उठा रहा हूं.

मैंने उसे उठाया और होंठों को बिना अलग किए ही मैंने उसे बेड पर ले जाकर पटक दिया. हम अलग हो गए, वो बेड पर पड़ी थी और मैं खड़ा था.

मैं अपनी शर्ट उतारने के लिए बटन खोलने लगा. शैली की आंखों में मुझे खाने की भूख साफ झलक रही थी.

मैंने आंखें मिलाए रखीं और अपनी शर्ट को उतार फैंका. शैली अपने नीचे वाले होंठ को अपने दांतों तले दबाने लगी और बहुत ही कामुक अंदाज से हमारे शरीर के मिलन की प्रतीक्षा करने लगी.

मैं शर्ट उतारते ही शैली के ऊपर टूट पड़ा और शैली के होंठों को अपने होंठों के बीच दबा कर उसे बेतहाशा चूमने लगा.

मेरा एक हाथ उसकी गर्दन को पकड़े था और दूसरा हाथ इस बार सीधा उसके वक्ष पर जाकर अपनी मजबूत पकड़ बना चुका था.

हम किस करते हुए खो से गए थे. कब दस मिनट निकल गए, पता ही नहीं लगा. हम दोनों की सांसें तेज हो चुकी थीं और हम भूल चुके थे कि हम कहां हैं.

मैंने होंठ अलग किए और शैली की संगमरमर सी गोरी गर्दन पर अपने होंठ टिका कर उसे फिर से चूमने लगा. शैली की सांसें तेज तो थी हीं, वो अपना होश भी खोने लगी थी.

वो मेरे बालों में हाथ फेरते हुए खेलने लगी और उसकी टांगों ने मेरी कमर को अपनी पकड़ में ले लिया था. मैं कभी उसकी गर्दन को चूमता, कभी उसके कान की लौ को, कभी उसके कंधों को चूमता.

इस वक्त मेरे दोनों हाथ शैली के मम्मों को पूरी अच्छी तरह से नापने में व्यस्त थे.

मैं उसकी चूचियों पर किस करने लगा तो उससे रहा नहीं गया, उसने मुझे तुरंत अलग करके बेड से सहारा लेकर अपनी पीठ को थोड़ा उठा लिया और अपनी शर्ट उतारने लगी.

मैंने उसकी सहायता की तो उसने शर्ट को फेंक दिया. उसने अन्दर लाल सफेद रंग की सुंदर सी ब्रा पहनी थी जिस पर नीले रंग के फूल बने हुए थे.

मैं उसके मम्मों को दुबारा अपने हाथों में दबोच कर उन्हें दबाना तो क्या ही कहूं, बस उन्हें आटा समझ कर मसलने और गूँथने लगा था.

शैली के मुँह से कामुक आवाजों की मधुर ध्वनि निकलने लगी- आआ ह्ह्ह!

मैंने अपने होंठ उसके जिस्म से अलग कर दिए और उसे थोड़ा ऊपर उठा लिया. फिर उसकी ब्रा को खोलने के लिए हाथ पीछे ले गया लेकिन उससे पहले ही शैली के हाथ वहां पहुंच चुके थे और वो अपनी ब्रा के हुक खोल चुकी थी.

मेरा काम बस ब्रा को निकाल कर फेंकना था. मैंने ब्रा उतारी तो सामने उसके दूधिया सफेद मम्मे तने हुए थे. उन पर हरी नसें साफ दिखाई दे रही थीं. उसके दूध ऐसे लग रहे थे कि जैसे मोटे मोटे संतरे हों.

मुझसे ज्यादा देर रुका नहीं गया और मेरे होंठों ने सहसा उन्हें चूम लिया. मैं उसके दूध चूम भी रहा था, साथ ही साथ मैं उन्हें अपने दूसरे हाथ से निचोड़ भी रहा था.

मैं कभी एक को चूमता तो दूसरे से खेलने लगता तो कभी दूसरे को चूमता और पहले को मसलने लगता.

शैली आंखें बंद करके बेहद कामुक सीत्कार करती जा रही थी.

तभी उसके हाथों ने मेरे सिर को पकड़ कर उसके निप्पल का रास्ता दिखा दिया.

जैसे ही मैंने निप्पल को जीभ से चाटा, शैली छटपटाने लगी और उसके हाथों ने मुझे उसके दूध के बीच में दबा दिया.

अब मेरे मुँह में शैली का एक निप्पल था जिसे मैं चूस भी रहा था और अन्दर मेरी जीभ उसे टटोले जा रही थी.

शैली का बुरा हाल हो चुका था; उसकी गर्म सांसें और कामुक सीत्कारें मुझमें और जोश भर रही थीं.

मैंने दो मिनट तक उसके एक निप्पल को चूसा, फिर दूसरे की तरफ गया तो वह तो जैसे एक बटन बन गया था. वो निप्पल फूल चुका था.

मैंने दूसरे की तरफ देखा तो पाया कि दोनों ही फूल चुके थे.

मैंने झट से दूसरे निप्पल को मुँह में पकड़ कर चूसना शुरू कर दिया.

पांच मिनट तक मैं बदल बदल कर उसके निप्पल चूसता चूमता रहा, फिर धीरे धीरे उसके पेट की तरफ जाने लगा.

उसके पेट के हर हिस्से को चूमते हुए मैं उसकी नाभि के पास आ पहुंचा.

उसकी नाभि को चूमते ही वो जैसे पागल हो गई और अपने दोनों हाथों का जोर लगा कर मेरे सिर को नीचे धकेलने लगी.

मैंने झट से उसकी शॉर्ट्स उतार दी और उसकी पैंटी भी साथ ही निकल आई.

ज्यादा विचार ना करते हुए मैंने उन्हें दूर फेंक दिया.

सामने देखा तो पाया कि एक प्यारी सी गुलाबी चूत मेरे लिए रो रही थी. उसकी चूत बिल्कुल अनछुई और मासूम सी लग रही थी. वह एकदम चिकनी थी और मेरे लंड का इंतजार कर रही थी.

शैली ने आज ही शायद अपने बाल साफ किए थे, उसकी एकदम चिकनी चूत अपना पानी छोड़ रही थी. वो खुलने के लिए शायद मेरे लंड के प्रहारों का इंतजार कर रही थी.

मैंने धीरे धीरे उसकी चूत की फांकों के नीचे जांघ को चूमा और साथ ही धीरे धीरे उसे उकसाने के लिए उसकी चूत के आस पास एक मिनट तक किस करता रहा. वह अपना पूरा दम लगा कर मुझे चूत चूमने का निमंत्रण दे रही थी, पर मैं उसके मुँह से सुनना चाहता था.

फिर उसने अगले ही पल कह दिया- अविनाश प्लीज़ यारर ... क्यों तरसा रहे हो. मैं उसकी इस कामुक इच्छा के आगे झुक गया और उसकी चूत चूमने के लिए आगे बढ़ा ही था कि तभी कमरे की घंटी बज गई.

ये शायद ईशा ही आई थी.

शैली को जैसे ही अहसास हुआ, वह जल्दी अपने कपड़े उठा कर बाथरूम की तरफ भागी और उसने अन्दर घुस कर दरवाजा बंद कर लिया. मैंने उठ कर अपने कपड़े पहने और दरवाजे की तरफ बढ़ा.

दरवाजा खोला तो ईशा दरवाजे पर खड़ी थी. वह सूट में थी जो कि गाढ़े नीले रंग का था.

वह शायद नहा कर गई थी जिससे उसके बाल थोड़े गीले लग रहे थे. उसके गीले बाल उसके बेदाग चेहरे को और खूबसूरत बना रहे थे. मम्मों पर उसका पारदर्शी दुपट्टा जो उसके डीप गले को ढकने की नाकाम कोशिश कर रहा था.

उसमें से ईशा के मम्मों के बीच की रेखा साफ दिख रही थी. मम्मों के बीच की गहराई आराम से नापी जा सकती थी. मैं उसे देखता ही रह गया, ऐसे लगा जैसे कोई अप्सरा खड़ी हो.

मैं उससे नज़रें हटा ही नहीं पा रहा था कि अचानक मुझे लगा कि 'नहीं अवि बस कर.'

पर बात यह थी कि अभी तक ईशा ने भी मुझे उसे देखने से नहीं टोका था. मैंने उसके मम्मों से ध्यान हटा कर उसके चेहरे की तरफ देखा तो उसका मुँह नीचे की तरफ था.

मैंने नीचे देखा तो मुझे अहसास हुआ कि मेरा लंड अभी तक खड़ा था जो मेरे पजामे को तंबू बना रहा था.

उसका ध्यान हटाने के लिए मैंने उसे आवाज दी- ईशा तुम आ गई? ईशा का ध्यान टूटा और उसने मुँह ऊपर करके कहा- हां, खाना लेने गई थी, शैली कहां है?

जैसे ही ईशा का ध्यान हटा, मैंने झट से अपना लंड सैट किया और ईशा को बताया कि शैली बाथरूम में है, वो नहा रही है.

ईशा ने बैग में से दो बॉक्स निकाले और एक छोटा बॉक्स मेरे पास लाकर बोली- मैं 10 बजे तक आ जाऊंगी, पास ही सिनेमा हॉल में मूवी की टिकट मैंने बुक कर ली. साढ़े नौ बजे तक फिल्म खत्म होगी और मैं खाना खाकर दस बजे तक वापस आ जाऊंगी. तब तक ये लो तुम दोनों के काम की चीज ... और मैं चली मूवी देखने. हां ये भी ले लो.

उसने अपने बैग में से एक बोतल निकाल के दी, जो लिक्विड चॉकलेट थी. मैंने कहा- ये? उसने कान में कहा- तुम दोनों के लिए ... अच्छे से एंजॉय करना और एक ही बार में पूरा इस्तेमाल मत कर देना, कहीं अगली बार के लिए बचे ही न!

वो मुस्कुराती हुई अपना छोटा पाउच लेकर रूम से बाहर चली गई.

मैंने चॉकलेट बोतल मेज पर रखी और दरवाजा बंद करके उस छोटे से बॉक्स को खोला, तो उसमें काले रंग की जालीदार ब्रा पैंटी थी.

तभी बाथरूम से शैली ने आवाज लगाई- ईशा तू आ गई? "ईशा आई थी, वो खाना देकर वापस चली गई. वो फिल्म देखने गई है, आते हुए में खाना खाकर आएगी." "लेकिन अकेली ... ओह समझ गई!"

मैंने बाथरूम के दरवाजे के पास वह छोटा बॉक्स रखा और शैली को आवाज लगाई- शैली, दरवाजे पर तुम्हारे लिए कुछ है. बिना कुछ पूछे उसने दरवाजा खोला और बॉक्स उठा लिया.

कुछ देर बाद शैली नहा कर बाथरूम से बाहर निकली तो उसने तौलिया लपेट रखा था. उसने तौलिया अपने मम्मों के ऊपर तक बांध रखा था.

हल्के गीले बाल, आंखों में काजल, प्यारे गुलाबी होंठ, उसमें से आती बहुत ही मनमोहक खुशबू और कंधों पर वही नई ब्रा की स्ट्रैप.

मैं उससे नज़रें नहीं हटा पा रहा था. मेरे कदम अपने आप शैली की तरफ बढ़ गए हर कदम के साथ उसके शरीर से उठती लहर की तरह वह खुशबू मुझमें और जोश भर रही थी.

मेरी सांसें तेज होने लगीं और मैं और तेज कदमों के साथ शैली की तरफ बढ़ने लगा. मेरे दोनों हाथ उठने लगे और उसके पास जाकर उसके कोमल गालों को छूते हुए उसके माथे को चूम लिया. उसे अपनी बांहों में कसके एक पल को छुआ और दूसरे ही पल मैंने उसे घुमा कर उसे पीछे से बांहों में कस लिया.

जैसे ही शैली पलटी, उसके गीले बाल मेरे मुँह पर पानी की बूंदों की बौछार करने लगे.

मैं उसके गालों पर किस करने को जैसे ही पास गया, उसने मुँह पीछे कर दिया और हमारे होंठ एक दूसरे से मिल गए. मैं एक पल के लिए चकित सा था कि अचानक ये क्या हुआ. और दूसरे ही पल आनन्द के अहसास में मैंने उसके होंठों को जज्ब कर लिया.

मैंने उसे बेड पर ले जाने की सोची और उसे अपनी बांहों में उठाया तो वह शर्मा गई. उसे बेड पर ले जाकर पटक दिया मैंने!

शैली को बेड पर पटकते ही मैंने झट से अपनी टी-शर्ट उतार फैंकी और अधनंगा होकर उसकी तरफ देखा. फिर जैसे एक शेर अपने शिकार की तरफ बढ़ता है, वैसे ही मैं धीरे धीरे उसकी ओर बढ़ने लगा.

वह मेरी आंखों में देखती जा रही थी और अठखेलियां करने के लिए पीछे सरकती जा रही थी. मैं उसकी तरफ बढ़ता रहा, वह तकिये के पास जाकर रुक गई और मैं भी लगभग उसके ऊपर आ गया.

मैंने उसके होंठों पर होंठ रख दिए, वह भी किस करने लगी और मुझमें जैसे खो सी गई. मेरे हाथों ने न जाने कब उसके दोनों कबूतरों को जकड़ लिया और उन्हें मसलने लगा.

तभी अचानक से शैली ने मुझे रोका और झट से तौलिया उतार फेंका. उसने वही पारदर्शी काले रंग की ब्रा पैंटी पहन रखी थी जो मुझे उसे फाड़ फेंकने का निमंत्रण दे रही थी.

शैली अपने मम्मों को खा जाने को कह रही थी. मैंने झट उसकी संगमरमरी गर्दन को निशाना बनाया और किसी प्यासे आशिक की तरह उसे चूमने चूसने लगा.

मैं उस वक्त उसके जिस्म के हर हिस्से को खा जाना चाह रहा था. मेरे हाथ उसकी कमर को जकड़े हुए थे.

मैं अपने होंठों को धीरे धीरे उसके कंधों तक ले गया. वह भी इस आनन्द से भर गई थी और बस आह आह कर रही थी.

मैंने अपने दांतों से उसकी ब्रा की एक साइड की स्ट्रैप हटा दी. फिर धीरे धीरे अपने होंठों को बिना अलग किए उसके मम्मों तक ले जाने लगा.

अपने होंठों को रास्ता दिखाते हुए उसके मम्मों के बीच की रेखा में अपने होंठ और अपनी नाक घुसेड़ दी. मेरी गर्म सांसों के कारण शैली भी मदहोश होती जा रही थी. उसकी सांसें तेज होने लगी थीं, उसे आनन्द मिल रहा था, जिस कारण से उसकी सिसकारियां बढ़ती जा रही थीं.

मैंने उसकी ब्रा नीचे सरकाई और निप्पलों को मुँह में भर लिया, उनका रस पीने लगा. जैसे ही मैंने अपना मुँह उसकी दाईं ओर के निप्पल पर लगाया, वह मेरा नाम लेती हुई सीत्कारने लगी.

अपने दोनों हाथ मेरे सर पर रख कर अपने वक्ष पर मुझे दबाने लगी.

मैं करीब दस मिनट तक उसके ऊपरी शरीर को चूमता रहा. शैली पागल होती जा रही थी. वह मुझे नीचे झुका रही थी और मैं भी वही चाहता था.

इस बार देर न करते हुए मैं उसकी टांगों के बीच आ गया और मोर्चा संभाल लिया.

मैंने एक पल को उसकी आंखों में देखा और उसकी चूत पर नेट वाली पैंटी के ऊपर से ही जीभ को फेरा. मैं उसकी चूत से आती मादक खुशबू से होश खोता जा रहा था और वह पागल हो उठी थी.

वह मेरा चेहरा अपनी चूत पर दबाने लगी. गीली पैंटी में उसकी चूत हद से ज्यादा सेंसटिव हो चुकी थी. वासना का सैलाब उसके तन बदन में मानो उमड़ गया था.

फिर मैंने मुँह से ही उसकी पैंटी सरका दी और अपने हाथों से उसके चूतड़ों को सहलाने लगा.

मैंने उसकी चूत को देखा और एक बार उसकी आंखों की तरफ देखा, वह एक कातिल मुस्कान के साथ मुझे देख रही थी.

फिर मैं दोबारा अपने काम पर लग गया.

मैंने उसकी चूत को चूमा, ठीक उसके छेद के ऊपर जीभ को फेरा ... तो उसकी तो जैसे सांसें अटक गई थीं. मुँह 'आ ...' के अंदाज में खुला रह गया था. मैंने उसकी टांगों और चूत के बीच के भाग से चाटना शुरू किया और पहले पूरे चूत के एरिया को चाटा.

अपनी नाक चूत के अन्दर डाल कर उसकी सुगंध लेते हुए जीभ को उसकी चूत की दरारों पर फिराया. वह मचल उठी, उसने मेरे बालों को पकड़ कर खींचा, मैंने अपने नाक पूरी उसकी चूत में गाड़ दी.

उसे मीठा सा दर्द हुआ और वह आनन्द में खो गयी. मैं पूरे मन से चूत चाटने में ऐसा लगा हुआ था, जैसे ये मेरा पसंदीदा खेल हो और मैं इस खेल का पारंगत खिलाड़ी हूं.

मैंने अपनी दो उंगलियों से उसकी चूत की फांकों को अलग किया और अपनी जीभ को नुकीला करते हुए उसकी चूत में घुसेड़ दिया. मेरी गर्म जीभ के स्पर्श मात्र से ही उसकी चूत पिघल गयी और पानी छोड़ने लगी.

मुझसे जितना हो रहा था, मैं उतना अन्दर तक उसकी चूत में जीभ डाल कर चूस रहा था, भले ही मुझे सांस लेने में थोड़ी तकलीफ हो रही थी. मगर उसकी चूत के रस की खुशबू ने मुझे जैसे उसका दीवाना बना लिया था.

वह इतनी गर्म हो गई थी कि ज्यादा देर टिक नहीं पायी और झड़ गई. मैंने मुँह अभी भी नहीं हटाया, मैं उसके रस को मस्ती में पी रहा था और मुझे तनिक भी जल्दी न थी.

पूरा रस चाट कर मैंने उसकी चूत को साफ किया. फिर ऊपर उसकी तरफ बढ़ा.

उसकी आंखें आधी बंद थीं और चेहरे पर आनन्द भरी मुस्कान थी.

उसके बाल जो नहाने से हल्के गीले थे, उनमें पसीने से थोड़ी और नमी सी आ गई, जिस से वे घुंघराले लगने लगे और वह और प्यारी लगने लगी.

मैं उसके चेहरे को निहार रहा था और अपनी उंगलियों से उसके चेहरे पर आए बालों को हटा रहा था. इससे उसकी आंखें थोड़ी खुल गईं.

जैसे ही उसकी आंखें खुलीं, मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए, जिससे उसकी आंखें दुबारा से बंद हो गईं. वह अब बेजान सी हो गई थी, पर उसके होंठों ने भरपूर जवाब दिया कि अभी वह मेरे साथ ही है.

मैं उसे चूम रहा था और उसे उसकी चूत के रस का स्वाद भी चखा रहा था.

दो मिनट बाद उसके हाथ मेरे सर पर आ गए और मेरे बालों से खेलने लगे. हम फिर से एक दूसरे के होंठों को बेतहाशा चूम रहे थे और हमारे हाथ एक दूसरे के शरीर से खेल रहे थे.

मैंने उसके होंठों से होंठ अलग किए और अपना कच्छा निकालने लगा. उसने मुझे रोक दिया और खुद अपने हाथों से उसे नीचे करने लगी.

जैसे ही मेरा कच्छा नीचे हुआ, लंड एकदम से झटका लेते हुए उछलते हुए बाहर निकल आया. जिसे देख कर वह मेरी तरफ अचंभे से देखने लगी.

मैंने उसके गालों को छुआ तो उसमें थोड़ी हिम्मत आई. वह नीचे की ओर देख कर मेरे लंड को निहारने लगी.

मैंने पूछा- क्या हुआ? "यार मुँह में थोड़ा अजीब सा लग रहा है, नहीं ले पाऊंगी शायद अभी, अवि तुम्हें कोई दिक्कत तो नहीं है?" मैंने उसे बीच में टोका- पागल हो क्या यार ... तुम्हारा ही है, जो मर्जी करो, जब मर्जी करो.

मेरी बात सुन कर वह अजीब सा मुँह बना रही थी, जैसे कुछ गहन सोच में हो. तभी उसने अचानक मेरे लंड की चमड़ी को पीछे किया और उस पर किस कर दिया

जैसे वह उसकी तरफ नज़रें करके बोली- मेरे राजा, ये अभी मुँह में नहीं जा सकता तो क्या हुआ, ये महाशय मेरे अन्दर किसी और जगह तो जा ही सकते हैं.

इतना कहते ही वह बेड पर पीठ टिका कर लेट गई और उसने अपनी टांगें फैला दीं.

आगे का काम मुझे पता था. मैंने अपने लंड को उसकी चूत के मुहाने पर लगाया और उस पर हल्का रगड़ने लगा.

चिकनाई कम लगी, तो मैंने अपने मुँह से ढेर सारा थूक उसकी वर्जिन पुसी पर लगा दिया. यह देख कर शैली ने भी अपने मुँह से ढेर सारा थूक अपने हाथ पर निकाल कर लंड पर लगा दिया जिससे पूरी चिकनाई हो जाए.

मैंने थोड़ी देर लंड चूत पर रगड़ा और उसके छेद की तरफ करके धीरे से दबाव बनाया, जिससे वह धीरे धीरे अन्दर जाने लगा.

शैली के मुँह में मैंने मेरी शर्ट दे दी थी जिससे आवाज ज्यादा बाहर न आए. पर आंसू तो नहीं रोक सकता था ... उसके आंसू बह निकले!

वह कुछ कहना चाहती थी और शायद मैं जानता था कि उससे बर्दाश्त नहीं हो रहा है. मैं बाहर निकाल लेने की सोचने लगा. पर मैं वहीं रुका रहा. कुछ पल वहीं लंड घुसाए झुका रहा.

जब शैली थोड़ा शांत हुई तो मैंने थोड़ा और दबाव डाला. उसके हाथों ने मुझे रोकने की पूरी कोशिश की पर मैं कहां रुकने वाला था.

मैंने पूरा दबाव दे दिया था जिससे आधे से ज्यादा लंड उसकी चूत में समा गया था.

शैली की आंखों से फिर से पानी बहने लगा पर इस बार वह सहन कर गई थी. मैंने झटके से बचा हुआ लंड उसकी चूत में दे दिया.

वह पागलों की तरह छटपटा उठी और रोने लगी.

उसके मुँह से मैंने अपनी शर्ट निकाल दी, जिससे उसके रोने की हल्की हल्की आवाज बाहर आने लगी.

मैंने उसके कान के पास जाकर कहा- मेरी जान, सॉरी ... रुक जाता और फिर बाद में करता, तो बहुत ज्यादा ही दर्द होती. तुमको दोबारा यही दर्द सहना पड़ता. अब प्लीज चुप हो जा यार.

शैली धीरे धीरे चुप होने लगी. उसने मुझे पीठ से जकड़ रखा था और अपने गले से लगा रखा था.

वह जब बिल्कुल शांत हो गई तो मैंने धीरे से अपनी कमर ऊपर उठाई ताकि लंड को अन्दर बाहर कर सकूं. पर जैसे ही मैंने कमा उठाई, शैली दुबारा दर्द में थी.

मैं रुका और कहा- अभी भी दर्द है क्या? उसने बस अपना सिर हा में हिला दिया और मैं 2 मिनट के लिए रुक गया.

फिर कमर से धक्का लगाने से पहले मैंने उसके कान में कहा- करूं शुरू? उसने अपना सिर हां में हिला दिया.

मैंने इस बार धीरे से अपनी कमर हिलाई जिससे बहुत ही धीरे से लंड बाहर आने लगा. मैं फिर धीरे से अन्दर डालने लगा.

ऐसे ही मैं उसे 1-2 मिनट तक कम स्पीड पर धक्के लगाने लगा था.

जब शैली के गले से मादक सीत्कार आना शुरू हुई, तो मैंने धीरे धीरे अपनी स्पीड बढ़ानी शुरू की.

इसी के साथ शैली की कामुक आवाजें भी धीरे धीरे बढ़ने लगीं.

उसकी आवाजें इस बात का प्रमाण थीं कि वह अब खुश है और उसे मजा आ रहा है. शैली की पकड़ मजे में ढीली होती जा रही थी, जिससे मैं उसके सीने से उठ कर प्रॉपर मिशनरी पोजीशन में आ गया और अब पूरी ताकत से धक्के लगाने शुरू कर दिए.

शैली खुश थी, उसका दर्द अब खत्म हो चुका था ... अब रह गई थी तो बस उसकी सीत्कारें.

मैं दस मिनट तक धक्के लगाता रहा जिससे मैं और शैली दोनों ही अपने चरम पर पंहुचने लगे थे. अगले कुछ ही पलों में शैली के मुँह से एकदम से निकला- आंह फास्टर अवि ... आई एम कमिंग.

मुझसे जितना हो सका, मैं उतना तेज हो उठा. उसकी सीत्कार मुझमें जोश भर रही थीं और मैं पूरी तेजी से धक्के लगाने लगा.

करीब पंद्रह धक्के के बाद शैली झड़ गई. उसने पूरी ताकत से चिल्ला कर सीत्कार करते हुए मुझे बताया.

मेरा जोश भी बढ़ गया, तो मैंने भी पूरी तेजी से धक्के लगाए. दो मिनट बाद ही मैं भी झड़ गया और निढाल होकर शैली के साइड में जा गिरा.

यह थी मेरी और शैली की चुदाई की कहानी. मैं उम्मीद करता हूँ कि आपको यह पसंद आई होगी.

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